मयूर यूथ क्लब – रामलीला 2011

मयूर यूथ क्लब द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी रामलीला का भव्य मंचन श्री राम मंदिर (मयूर विहार, पाकेट-1, दिल्ली-110091) के प्रांगण में 27 अगस्त 2011 से 6 अक्तुबर 2011 तक किया जायेगा.

अत:, आप सभी से अनुरोध है कि अधिक से अधिक संख्या में आकर भगवान श्री रामचन्द्र जी की लीला का आन्नद लें. रामलीला 2011 से संबंधित ताजा अपडेट के लिये www.mayuryouthclub.com mayuryouthclub.wordpress.com पर जाएँ.

Advertisements
Uncategorized में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , , | 1 टिप्पणी

मयूर यूथ क्लब : रामलीला का भूमि पूजन सम्पन्न

मयूर यूथ क्लब द्वार मयूर विहार-1 में आयोजित की जाने वाली रामलीला 2010 के लिये भूमि पूजन का आयोजन रविवार दिनांक 20.10.2010 को हर्षोउल्लास से सम्पन्न किया. श्री राम मंदिर परिसर में भारी वर्षा के बीच आयोजित भूमि पूजन थोडा विलम्ब से शुरू हुआ. भूमि पूजन दोपहर 12 बजे शुरू हुआ जो कि सुबह 9.30 बजे होना था. श्री राम मंदिर परिसर में दस दिन तक श्री राम चन्द्र जी के जीवन कि मुख्य घटनाओं का मंचन किया जायेगा और दशहरे पर यहाँ श्री राम चन्द्र जी की शोभा यात्रा निकाली जायेगी और रावण, मेघनाद और कुम्भकरण के पुतलों का दहन भी किया जायेगा.


Bhoomi Poojan

Bhoomi Poojan

श्री अरुण कुमार (साँस्कृतीक मंत्री) जो हनुमान के पात्र में भी दिखेंगे उन्होंने विधिवत पूजा की और नारियल तोडा. और इस प्रकार पिछले 15 वर्षों से होने वाली इस रामलीला में एक सुनहरा वर्ष और जुड गया. प्रबंधन समिति और मयूर यूथ क्लब के सभी सदस्यों ने भी पूजा में हिस्सा लिया. यह संयोग ही है कि इस वर्ष दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल भी इसी दौरान आयोजित किये जा रहे हैं.

मयूर यूथ क्लब प्रत्येक व्यक्ति को इस धार्मिक कार्यक्रम से जुडने और इसे देखने के लिये प्रोत्साहित करता है. यदि कोई भी व्यक्ति इसमें भाग लेना चाहता है अथवा किसी भी प्रकार की जानकारी चाहता है तो आप हमें ई-मेल कर सकते हैं : info@mayuryouthclub.com

Mayur Youth Club Group Photo

Mayur Youth Club Group Photo

 


Naresh Subhash Naveen Arun

Jai Sri Ram

मयूर यूथ क्लब, मयूर यूथ क्लब रामलीला, नरेश रामलीला, मयूर विहार रामलीला, दिल्ली की रामलीला, mayur youth club, ramlila in mayur vihar, delhi ki ramlila, naresh ramlila, mayur youth club blog, ramlila blog

मेरी रचनाएँ, रामलीला संवाद में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , , , , , , , , , , , , , , , , | टिप्पणी करे

भरत कैकेई संवाद

हे माता तुम मुझे ये बताओ:

वो सुकुमारी सीता माता, वन में क्यों कर रहती होंगी
कैसे वर्षा या कडी धूप, सर पर अपने सहती होंगी
वन में तपती बालू में चल, अत्यन्त विकल होती होंगी
रजनी में सूखे पत्तों पर, या कांटों पर सोती होंगी
वन में श्री राम समर्थ भाई, सौमित्र लखन सा भ्राता है
जिस घर में कुबडी सी दासी हो, और कैकेई जैसी माता हो
जब इतने पर भी वज्र गिरा, और छोडे प्राण पिताजी ने
क्या यही देखने को था, ना जीवन ना जीवन मुझ दुर्भागी ने
शत्रुघ्न किनारे सरयू के, तुम मुझको भी पहुँचा देना
हो जभी पिता का दाहक्रम, मेरी भी चिता जला देना

भरत कैकेई संवाद, भरत शेर, रामलीला में भरत का शेर, मयूर यूथ क्लब, मयूर यूथ क्लब रामलीला, नरेश रामलीला, मयूर विहार रामलीला, दिल्ली की रामलीला, bharat kaikai samwad, bharat sher, ramlila main bharat ka sher, mayur youth club, ramlila in mayur vihar, delhi ki ramlila, naresh ramlila, mayur youth club blog, ramlila blog

रामलीला संवाद में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , , , , , , , , , , , , , , | टिप्पणी करे

हे राम, जवाब दो…

हाँ, हाँ सुने हैं…
…सुने हैं तेरे बडप्पन के चर्चे,
बनता है तू मर्यादा पुरूषोत्तम,
और ये भी सुना है कि तूने,
ली थी अग्नि परिक्षा,
एक पतिव्रता स्त्री की.

तुझे आदर्श मान कर,
सुना है कलियुग में,
लोग अनुसरण करते है तेरा,
पर तूने किसका अनुसरण किया था,
उसे घर से निकाल कर?

तूने क्या पाप किया था, बता?
जो लडनी पडी थी, तुझे,
अपने ही बच्चों से लडाई,
और हाँ, ये भी सच है,
कि तूने मुँह की खाई थी, नन्हों से.

और उस भाई का क्या?
जिसने जिन्दगी गुजार दी,
तेरी ही सेवा में,
उसको भी मार दिया,
केवल एक प्रतिज्ञा के लिये.

न जाने किन मर्यादाओं के लिये,
बना है तू पुरूषोत्तम,
कभी सामना होगा तो पुछूँगा,
मैं…राम,
इन सवालों के जवाब,
क्या तुम दे पाओगे?

नरेश गुडगाँव, नरेश दिल्ली, नरेश ब्लौग, प्रतिज्ञा, प्रयास, ब्लौगवाणी, भगवान, भगवान राम, मर्यादा पुरूषोत्तम, यह भी खूब रही, राम, लक्ष्मण, सीता, हिन्दी चिट्ठा, bhagwan ram, laxman, maryada purushottam, naresh blog, naresh delhi, naresh delhi blog, naresh gurgaon, naresh seo, pratigya, pryas, sita, yah bhi khoob rahi
Mayur Youth Club मयूर यूथ क्लब

मेरी रचनाएँ में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , | टिप्पणी करे

सीता-लक्ष्मण संवाद

सीता चौपाई:
सुनहु देव रघुवीर कृपाला, यहि मृग की अति सुन्दर छाला।
मारहु नाथ इसे तुम जाई, कृपा सिन्धु सुन्दर रघुराई।।

सीता प्रोज: प्राणनाथ यह कितना सुन्दर मृग है। इसे पकड लीजिये न।

राम: प्रिये! यह हमारे पास ही तो विचर रहा है।

सीता: नहीं नहीं नाथ! इसे तो पकडकर ही लाईये।

राम: प्रिये तुम इसे पकडकर क्या करोगी!

सीता: स्वामी मैं इसे पालूंगी और अच्छे-अच्छे आभूषण पहिनाकर तथा हरी-हरी घास खिलाकर अपना मन बहलाऊंगी।

राम: और यदि हाथ न आये तो?

सीता: तो इसे मारकर मृगछाला ही लेते आईये।

राम: अच्छा तो मैं जाता हूँ। लक्ष्मण तुम सावधानी से रहना।

लक्ष्मण: जो आज्ञा भ्राता जी। (राम का प्रस्थान)

[मृग के साथ राम का दिखाई देना तथा दूर से आवाज का आना]

प्राउन्टर कहे: लक्ष्मण! हाय लक्ष्मण! मेरी साहयता के लिये आओ। भैया लक्ष्मण।

सीता: लक्ष्मण ! लक्ष्मण! सुन रहे हो यह आवाज कहाँ से आ रही है?

लक्ष्मण: हाँ माताजी! कोई मेरा नाम लेकर मुझे साहयता के लिये पुकार रहा है!

सीता: कोई कौन? यह तो तुम्हारे ही भाई की आवाज है और तुम्हें साहयता के लिये बुलाया है। जाओ जल्दी जाकर उनकी साहयता करो।

लक्ष्मण: माता जी! आप तो यों ही संदेह कर रही हैं।

सीता: नहीं-नहीं वे अवश्य विपत्ति में हैं, क्योंकि इस वन में राक्षसों की संख्या बहुत अधिक है।

लक्ष्मण: माता जी! मुझे भ्राता जी पर पूर्ण विश्वास है। भला राक्षस उनका बिगाड ही क्या सकते हैं।

सीता: लक्ष्मण! यदि तुम आपत्ति के समय भाई की साहयता न करोगे तो कब करोगे? क्या तुम्हारे इन शब्दों से स्वार्थ की भावना नहीं झलकती?

लक्ष्मण: माताजी! ऐसा न कहिये। अगर मैं यहाँ से चला गया तो फिर आपकी रक्षा कौन करेगा?

सीता: मुझे यहाँ क्या मौत खा रही है?

सीता गाना:
तू अभी जाके भाई की इमदाद कर, मौत मुझको यहाँ कोई खाती नहीं।
पास रहने की तेरी जरूरत नही, मैं यहाँ से कहीं भागी जाती नहीं।
हाय भाई ही भाई का दुश्मन बना, क्या करूं पार मेरी बसाती नहीं।
साथ आया था शायद इसी वास्ते, कि यहाँ तो ये मुख से बुलाती नहीं।
तेरी पहली सी आँखें नहीं अब रहीं, तेरी नियत नजर साफ आती नहीं।
तेरा होगा न पूरा इरादा कभी, तेरी सूरत मुझे अब सुहाती नहीं। तू अभी जाके…..

लक्ष्मण गाना:
मेरी माता तुम्हें आज क्या हो गया, किस किसम की ये बातें सुनाती मुझे।
आज मन में तुम्हारे ये क्या आ गया, बेगुनाह हाय दोष लगाती मुझे।
सब करा अरू धरा मिल गया खाक में, आप बदमाश कहकर बुलाती मुझे।
अच्छा माता तुम्हारा भी क्या दोष है, मेरी किस्मत ही धक्के खिलाती मुझे।
बेशरम बेरहम बेधरम बेहय्या, बेवफा बेनका तक कहाती मुझे। मेरी माता तुझे…..

लक्ष्मण: माता जी! आज न जाने आपको क्या हो गया है जो अकारण ही मुझ पर ऐसा दोष लगा रही हो। खैर आपको भी क्या दोष दूं। हमारी किस्मत ही यह सब खेल खिला रही है।

प्राउन्टर कहे: भैय्या लक्ष्मण तुरन्त आकर मेरी साहयता करो, लक्ष्मण! भैय्या लक्ष्मण आओ।

सीता: प्राणनाथ! आप किसको बुला रहे हो, जिसको आपने अपना भाई समझा था वह तो पूरा स्वार्थी है! प्राणनाथ! आप अपना जीवन अपने ही भाग्य पर छोड दीजिये किन्तु स्वार्थी भाई से कोई आशा न रखिये मैं एक अबला आपकी क्या साहयता कर सकती हूँ।

लक्ष्मण: माता जी! यह आप नहीं कह रही हैं, बल्कि आज होनी कि कालचक्र ने आपकी बुद्धि पर पर्दा डाल दिया है। अच्छा माता जी, मैं जाता हूँ किन्तु इतनी कृपा करना कि [रेखा खींचना] इस रेखा का उल्लंघन न करना।

लक्ष्मण शेर:
इस रेखा का उल्लंघन कर, जो पर्ण कुटी में आएगा।
          है आन उसे लक्ष्मण की तत्काल भस्म हो जाएगा।।
हे पवन देव तुम साक्षी हो, हे पक्षी गणों गवाह तुमही।
           मेरी सेवा की नौका के, हे सूर्यदेव मल्लाह तुम्हीं।।
आज्ञा पालन करता हुँ बस इतना है संतोष मुझे।
           रघुराई अगर उलहाना दें, तुम बतलाना संतोष मुझे।।

यह संवाद पुस्तक “श्री रामलीला अभिनय” सम्पादक: श्री छम्मीलाल ढौंडियाल से लिया गया है.

सीता-लक्ष्मण संवाद, लक्ष्मण राम, राम सीता, सोने का मृग, सीता चौपाई, राम चौपाई, लक्ष्मण चौपाई, मृगछाला, रामलीला संवाद, मयूर यूथ क्लब, छम्मीलाल ढौंडियाल, श्री रामलीला अभिनय, sita laxman samvad, laxman ram, ram sita, sone ka mrug, sita chaupai, ram chaupai, laxman chaupai, mrigchala, ramlila samvad, mayur youth club, chammilal dhaundiyal, sri ramlila abhinaya

रामलीला संवाद में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , | 1 टिप्पणी

Hello world!

Welcome to WordPress.com. This is your first post. Edit or delete it and start blogging!

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 1 टिप्पणी