हे राम, जवाब दो…

हाँ, हाँ सुने हैं…
…सुने हैं तेरे बडप्पन के चर्चे,
बनता है तू मर्यादा पुरूषोत्तम,
और ये भी सुना है कि तूने,
ली थी अग्नि परिक्षा,
एक पतिव्रता स्त्री की.

तुझे आदर्श मान कर,
सुना है कलियुग में,
लोग अनुसरण करते है तेरा,
पर तूने किसका अनुसरण किया था,
उसे घर से निकाल कर?

तूने क्या पाप किया था, बता?
जो लडनी पडी थी, तुझे,
अपने ही बच्चों से लडाई,
और हाँ, ये भी सच है,
कि तूने मुँह की खाई थी, नन्हों से.

और उस भाई का क्या?
जिसने जिन्दगी गुजार दी,
तेरी ही सेवा में,
उसको भी मार दिया,
केवल एक प्रतिज्ञा के लिये.

न जाने किन मर्यादाओं के लिये,
बना है तू पुरूषोत्तम,
कभी सामना होगा तो पुछूँगा,
मैं…राम,
इन सवालों के जवाब,
क्या तुम दे पाओगे?

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